अबू हुरैरा रज़िअल्लहु अन्हु से रिवायत है
कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया
कि जो शख्स रोज़ा रख कर ‘झूट'
बोलना और ‘फहश अमल करना तर्क न करे
तो अल्लाह को इस बात की कोई हाजत नहीं
के वह खाना पीना छोड़ दे.
(सही बुखारी)
धर्म केवल उपासना पद्धति और नाम जाप का ही नाम नहीं होता बल्कि वह मनुष्य को जीवन के हर पहलू में हर संकट में सही और सीधा मार्ग दिखाता है।
Monday, 19 July 2010
खावंद की इजाज़त
अबू हुरैरा रज़िअल्लहु अन्हु से रिवायत है
कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:
कोई औरत अपने खावंद (Husband)
की इजाज़त के बगैर (Nafli)
रोजाह नहीं रख सकती
(सहीह बुखारी, H# 5192;
सहीह मुस्लिम,H# 1026)
कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:
कोई औरत अपने खावंद (Husband)
की इजाज़त के बगैर (Nafli)
रोजाह नहीं रख सकती
(सहीह बुखारी, H# 5192;
सहीह मुस्लिम,H# 1026)
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